How Optical Fiber Works ( In Hindi )





ऑप्टिकल फाइबर क्या है?



 ऑप्टिकल फाइबर एक ऐसी पतली तार होती है जिससे लाइट का उपयोग कर के डाटा ट्रांसफर बहुत ही तेज़ी से किया जाता है। आप को बता दे की एक स्पेशल कोण से लाइट दिखाने पर ये टोटल इंटरनल रिफ्लेक्शन (total internal reflection) के सिद्धांत पर चलता है।


ऑप्टिकल फाइबर में बिजली का संचार नहीं लाइट का संचार होता है। लाइट का उपयोग करके इसकी स्पीड को बहुत तेज़ किया गया है। ऑप्टिकल फाइबर पतले कांच या प्लास्टिक से बानी एक तार होती है जिससे लाइट के रूप में जानकारी का प्रवाह होता है। ये तारें किन्ही अन्य तारों के मुकाबले बहुत महंगी होती है।

आप को ये जानकार हैरानी होगी कि इसमे डाटा तीन लाख किलोमीटर पर सेकंड की रफ़्तार से ट्रैवेल करता है। दरअसल ये स्पीड लाइट की है और इसमें इसी का इस्तेमाल कर डाटा को इतनी तेज़ी के साथ भेजा जाता है।







optical fiber communication in Hindi


ऑप्टिकल फाइबर पर जहाँ डाटा रिसीव किया जाता है वहां एक ट्रांसमीटर लगा होता है। आप को बता दे की यहीं से डाटा ऑप्टिकल फाइबर लाइन से जाता या अlता है।

यह ट्रांसमीटर इलेक्ट्रॉनिक पल्स इनफार्मेशन को सुलझाता है और इसको प्रोसेस करके लाइट पल्स के रूप में ऑप्टिकल फाइबर लाइन में ट्रांसमिट कर देता है।

डिजिटल डाटा लाइट पल्स के रूप में केबल के अंदर भेजा जाता है। इनको रिसीवर एन्ड पर बाइनरी वैल्यू में बदल लिया जाता है। इसी को आपका कंप्यूटर समझ पता है और आपको जानकारी दे पता है।


 (structure of optical fiber cable in Hindi)


आप को जान कर हैरानी होगी की इसकी मोटाई आपके एक बाल से भी काम होती है। ऑप्टिकल फाइबर केबल में दो लेयर होती हैं। पहली लेयर का नाम कोर होता है और दूसरी का क्लैडिंग

इनके रेफ्रेक्टिवे इंडेक्स की वजह से ही ऑप्टिकल फाइबर में इंटरनल रिफ्लेक्शन हो पाता है। इसको पोलीमाइड की लेयर से ढाका जाता है ताकि यह सुरक्षित रह सके।

उपयोग के हिसाब से और लेयर भी चढाई जा सकती हैं ताकि एनर्जी और लाइट एक से दूसरे फाइबर में न जा पाए।

Types of optical fiber cable in Hindi

ऑप्टिकल केबल को उनकी स्ट्रेंथ और सिग्नल मोड के आधार पर बांटा जा सकता है।

स्ट्रेंथ के आधार पर:

  1. लूज कॉन्फ़िगरेशन–  लूज कॉन्फिग्रेशन फाइबर ऑप्टिक केबल में कांच या फाइबर कि कोर के चारों ओर एक लिक्विड जेल भरा होता है। ये जेल प्रोटेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत काफी काम होती है।
  2. टाइट कॉन्फ़िगरेशन– इसमें स्ट्रेंथ वायर का प्रयोग किया जता है जो की  इसे तोड़ने और मुड़ने से बचाती है। इनका वजन स्ट्रेंथ वायर के कारन ज्यादा हो जाता है।

सिग्नल मोड के आधार पर:

  1. सिंगल मोड– सिंगल मोड में एक समय में एक ही सिग्नल का प्रवाह हो सकता है। यानि इसमें लाइट का एक ही मार्ग होता है। सिंगल मोड की क्षमता बहुत दूर डाटा पहुँचाने की होती है।
  2. मल्टीमोड– मल्टिमोड़ में एक से ज्यादा सिग्नल का प्रवाह हो सकता है। यानि इसमें एक से अधिक लाइट मार्ग होते है। इन्हे कुछ इस रूप सेट किया जाता है की ये आपस में एक दूसरे न टकरायें या आपस में न मिलें। इसी कारण ये सिंगल मोड के मुकाबले काफी कम दुरी तय कर पाने में सक्षम हों पाती है।


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